
दादाजी की नगरी खंडवा पहुंची पहुंचीं पूज्य कृष्णप्रिया जी महाराज, का हुआ स्वागत अभिनंदन,

नानी बाई रो मायरो कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब।
खंडवा। दादाजी की नगरी खंडवा में पांच दिवसीय “नानी बाई रो मायरो” कथा का शुभारंभ भक्तिमय वातावरण में हुआ। खंडवा में दादाजी गौ माता एवं श्रद्धालुओं कथा का श्रवण करवाने पहली बार खंडवा पहुंचीं पूज्य श्री कृष्णप्रिया जी महाराज का श्रद्धालुओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। बस स्टैंड पर समिति संयोजक आशीष चटकेले, रामचंद्र मौर्य, सुनील जैन राकेश दीप्ति थापक सहित श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। समाजसेवी व समिति सदस्य सुनील जैन ने बताया कि कथा आयोजन को लेकर शहर के धर्म प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कथा के प्रथम दिवस व्यास पीठ एवं पूज्य दीदी का समिति पदाधिकारी एवं गणमान्य जनों ने स्वागत अभिनंदन किया। कथा में मंच पर महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी जी भी विराजमान थे उन्होंने भी आयोजित कथा को लेकर अपनी बात रखी एवं आयोजकों को आशीर्वाद प्रदान किया। दीदी द्वारा मंगलाचरण एवं गणेश वंदना के साथ कथा का शुभारंभ हुआ भक्त और भगवान के विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति, धैर्य और विश्वास का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो भगवान स्वयं उसके कष्ट दूर करने के लिए किसी न किसी रूप में उसके जीवन में उपस्थित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि सच्चे भाव, सेवा और करुणा में भी निवास करते हैं।
दीदी ने कथा में कई भावपूर्ण वृत्तांत सुनाए। उन्होंने बताया कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर व्यक्ति को धैर्य नहीं खोना चाहिए। जिस प्रकार भक्त प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु का स्मरण नहीं छोड़ा, उसी प्रकार हर व्यक्ति को अपने जीवन में आस्था बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, धन-दौलत के नहीं। सुदामा की सच्ची मित्रता और भक्ति ने उन्हें भगवान के सबसे प्रिय भक्तों में स्थान दिलाया।
कथा के दौरान पूज्य कृष्णप्रिया जी महाराज ने अधिक मास और दीपदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पीपल, बरगद, बिल्वपत्र वृक्ष और मंदिरों में दीपदान करने से कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। सद्कर्म व्यक्ति को जीवन के कठिन समय में मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं और संकटों से उबरने का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने गृहस्थ जीवन में धैर्य और शांति की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जहां धैर्य नहीं होता वहां भक्ति का रस भी नहीं मिलता। मन शांत रहेगा तभी व्यक्ति भगवान से जुड़ पाएगा और जीवन में वास्तविक आनंद की अनुभूति होगी। सुनील जैन ने बताया कि कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजनों और भक्तिमय वातावरण से पूरा परिसर गूंज उठा। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। कथा के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक प्रसंगों और भजनों का आयोजन किया जाएगा। समिति के संयोजक आशीष चुटकुले एवं पदाधिकारी ने सभी धर्म प्रेमी बंधुऔ, मातृशक्ति से अधिक मास वृंदावन की प्रसिद्ध दीदी कृष्ण प्रिया जी के मुखारविंद से नानी बाई का मायरा कथा श्रवण करने का अनुरोध किया। मंगलवार से चार दिनों तक श्री गणेश गौशाला में दीदी की कथा दोपहर 3:00 बजे से प्रारंभ होगा, संचालन भूपेंद्र सिंह चौहान ने किया।








